प्रागैतिहास

पश्चिमी म. प्र. प्राचीनकाल में अवंति जनपद का हिस्सा था । देवास जिले के सर्वेक्षण में पस्तीपुरा, पलासी, नेमावर ग्रामो में जीवाश्म तथा पत्थर के औजार पाये गये । इसके अतिरिक्त उत्तर पाषाण काल के औजार सोनकच्छ तहसील के घण्टयाकला गांव में पाये गये है । देवास शहर में चामुण्डा पहाड़ी पर स्थित देवी चामुण्डा की मूर्ति 9-10 शताब्दी (AD) का होना माना जाता है ।

देवास नाम का उल्लेख नागद-बिलावली -बांगर-घटीकला के शिलालेखो में पाया जाता है । निकलंब ग्राम गुप्तकाल से संबंधित बताया जाता है ।

देवास जिले में परमार कालीन स्थल होने का भी प्रमाण मिलता है । जिले के नागदा,बिलावली, नेमावर, सिया, टोंककला, निलंक नायताकला, धनतलाब, बिजवाड़, छावडा-धीरा पीपलरांवा, गंधर्वपुरी आदि परमार कालिन स्थल है । सीतावन में परमार काल के भग्न योगिनी मंदिर के अवशेष मिलते है । जिनमे योगिनी की आकृतियाँ मिलती है ।

चट्टानों पर उकेरी गई आकृतियाँ खेड़ाखाल ग्राम के समीप तथा राजोर (नेमावर के पास) तथा देवास में भी मिलती है । सतवास की एक मस्जिद को 16 वी शताब्दी में शेरशाह सूरी द्वारा निर्मित बताया जाता है । इसके अतिरिक्त मुगलकाल की कई सुन्दर बावडिया एवं मराठा काल के भित्तिचित्र देवास शहर के मंदिरो में दिखाई देते है ।