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देवास के धार्मिक स्थल
 
चामुण्डा टेकरी

देवास नगर , चामुण्डा टेकरी नामक पहाड़ी के नीचे स्थित है । यह टेकरी चामुण्डा पहाड़ी (टेकरी) के नाम से जानी जाती है । इस पहाड़ी की ऊंचाई 300 ft है ।  देवास नगर का नाम इसी पहाड़ी की वजह से रखा गया है । मान्यता रही है कि इस पहाड़ी पर देवी की गुफा ( देवी का वास) है जो की देवीवासिनी के नाम से जानी जाती है ।        देव + वास = देवास । चामुण्डा पहाड़ी पत्थरो की चट्टानों सीढ़ीनुमा रचना से बनी है । गुफा की दीवार पर चामुण्डा देवी की प्रतिमा उत्क्रीर्ण है । इस पहाड़ी पर मुख्य रूप से दो मंदिर है एक छोटी माता चामुण्डा माता और दूसरा बड़ी माता (तुलजामाता) या तुलजा भवानी के नाम से जाने जाते है ।

Chamunda Devi Tample View Tulja Bhavani

महाकालेश्वर बिलावली

बिलावली गॉँव A. B.  रोड पर देवास से उत्तर की ओर 3 K. M.   दूर स्थित है । इस गांव में भगवान शिव का मंदिर है जो महाकालेश्वर कहलाता है । इस शिवलिंग का एक महत्वपूर्ण व अद्वीतीय आकृति एवं गुण यह है कि यह हर वर्ष आकर में बढ़ता जाता है । हर वर्ष यहाँ पर शिवरात्रि पर मेला लगता है ।

Gate of Temple Shivling

 केला देवी

केला देवी का मंदिर मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा मंदिर है । (प्राचीन मंदिरो की तुलना में) वास्तविक केला देवी का मंदिर करोली राजस्थान में स्थित है । देवास में केला देवी का मंदिर आगरा - बॉम्बे रोड पर मिश्रीलाल नगर में स्थित है । इस मंदिर का संगमरमर का सफ़ेद दरवाजा आकर्षण का केंद्र रहा है ।    


सिद्धेश्वर महादेव

नर्मदा नदी के किनारें एक पवित्र  मंदिर स्थित है जो मालवा के परमारों द्वारा बनाया गया था । इस मंदिर के शिखर पर सर्पिलाकार रचना में सूक्ष्म चित्र उकेरे गए है । जो अद्धितीय है। इस मंदिर में एक सभा मंडप एवं ओसारा ( ड्योढ़ी) बाद में बनाई गई है ।


महादेव मंदिर (शंकरगढ़)

सन 1942 में देवास के शासक श्री मंत सदाशिव राव महाराज ने गिरी त्रेश्वर मंदिर की स्थापना की । इस मंदिर तक पहुंच मार्ग पहाड़ी को काटकर रास्ता बनाकर बनाया गया था । समय-समय पर संत और महात्मा यहाँ पर ठहरते थे जो देवासवासियों को आध्यात्मिक ज्ञान देते थे ।

 


धारा जी

धारा जी , एक ऐतिहासिक , धार्मिक एवं पर्यटक स्थल है । यह नर्मदा नदी के किनारे स्थित है। यह बागली तहसील के धारा जी नामक गांव में स्थित है । यहाँ पर सुन्दर झरना बहता है । जो नर्मदा नदी से उत्पन्न हुआ है । लाखो की संख्या में लोग यहाँ अमावस्या पर एकत्रित होते है तथा यह धारणा रखते है कि यहाँ आने पर बुरी शक्तियों का नाश हो जाता है । यहाँ पर स्थित शिवलिंग इतने पवित्र माने जाते है की उन्हें पूजा से पहले प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं है ।

 


नारायण कुटी एवं शक्तिवत परंम्परा
Swami Vishnu Teerth Swami Narayan Teerth Dev

नारायण योगेन्द्र श्री 108 शीलनाथ महाराज

वास्तविकता यह है कि देवास नगर औधौगिक क्षेत्र के बजाय एक पवित्र स्थल के नाम से ज्यादा प्रसिद्ध है यहाँ पर दैवीय शक्तिया अपनी ऊर्जा फैलाती है जो की तरंगो एवं स्पंदन के रूप में महसूस की जा सकती है । शीलनाथ महाराज दैवीय प्रकाश की एक किरण है । वह जयपुर के एक रॉयल परिवार से थे परन्तु अपने जीवन काल के प्रारंभिक अवस्था में ही उन्हें दुनियादारी की भौतिकता में रूचि नहीं थी इसलिए वे योगी बन गये और पंजाब के हंसी जिले गोरख सिन्धा सम्प्रदाय के साथ अध्यात्मिका की ओर चल दिये । सन 1839 में उन्होंने इलाचीनाथ महाराज जो इसी सम्प्रदाय के थे , उनसे दीक्षा ली । और आगे के 36 वर्षो तक वे योग साधना करते रहे । एक बार जब वे देवास के जंगलो से गुजर रहे थे , तब उन्हें यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य , शांति एवं परिवेश साधना के लिए उपयुक्त एवं अनुकूल लगा तथा उन्होंने यही पर साधना करना शुरू कर दिया । न्यायाधीश बलवंत राव बाबू ने रानीबाग ठहरने के लिए इन्हे निमंत्रित किया । बाद में मालराव राव पंवार इनकी दैवीय शक्ति से प्रभावित हुए और उन्हें वैसी ही व्यवस्थाऐं देवास में प्रदान की । सन 1921 में इन्होने अपने भौतिक शरीर को छोड़ दिया एवं दिव्य प्रकाश में विलिन हो गये । देवास में लम्बे दौर तक रहने के कारण कई लोगो ने इनसे आशीर्वाद एवं दीक्षा ली जिनमे से बाल्कदास जी महाराज राजबली खान साहेब एवं पंडित कुमार गन्धर्व शामिल थे ।

 


श्री मनीभद्रवीर मंदिर

बागली तहसील के मातमोर गांव को जैन तीर्थ स्थल "शिवपुर" को मनीभद्र वीर श्वेताम्बर जैन, चिंतन एवं भक्ति केन्द्र माना जाता है । इस स्थान पर रथनुमा मंदिर बनाया गया है । जिसका उद्घाटन उन्नीस मई उन्नीस सौ इक्यानवे में हजारो भक्तजनो की उपस्थिति एवं श्री वीर रत्न विजय जी महाराज साहेब के दिव्य मार्ग दर्शन में किया गया । यहाँ पर बहुत सी सुविधाऐं जैसे पुस्तकालय , वृद्धाश्रम , भण्डार घर , जैन  भिक्षुक के लिए आश्रम , तीर्थ यात्रियों के लिए आश्रम प्राचीन कविताओ की हस्तलिपी, तंत्रो के द्वारा ज्योतिषीय विधी से उपचार , हस्तलिपी में यंत्र मंत्र यह तीर्थ  स्थान एक प्राकृतिक परिवेश में बना हुआ है जो तीर्थ यात्रियों को भोजन एवं रहने की व्यवस्था बगैर शुल्क लिए देते है । तीर्थयात्री श्री वीर रत्न विजयी महाराज के प्रवचन सुन सकते है ।

 


ग्रेस चर्च

ग्रेस चर्च देवास का प्राचीनतम चर्च है यह 15 अप्रैल सन 1928 में प्रो. जे. डब्ल्यू जोहरी के प्रयासों से बनाया गया था, जिन्होंने ब्लू प्रिंट तैयार की एवं स्वयं की देख रेख में बनवाया । महाराज मल्हार राव पंवार ने क्रिश्चियन लोगो के धार्मिक स्थल बनवाने के लिये जमीन एवं पैसे दिए । यह चर्च महाराज के सर्वधर्म के प्रति आदर के भाव का प्रतीक है । आदरणीय श्री विलियम (1917 से 1938) इस चर्च के प्रथम मंत्री (पादरी) थे ।   

 


दत्त मंदिर

गुरु द्वारा

यह आगरा बॉम्बे रोड पर बस स्टैंड के पास स्थित है ।


    कासाबान मस्जिद

    काली मस्जिद

    शाही जमा मस्जिद