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  • कुमार गन्धर्व
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कुमार गन्धर्व हिन्दुस्तानी शास्त्री संगीत के एक अदभुत कलाकार के रूप में जाने जाते है । उनकी विशिष्ट संगीतकला एवं संगीत रचना की कला के कारण उन्होंने एक विशिष्ट स्थान पाया है । समकालिन शास्त्रीय संगीत में उनका योगदान अद्वितीय योगदान रहा है, और उनके कार्य क्षेत्र के परिणाम दूरस्थ पहुंच वाले रहे है ।

8 अप्रैल सन 1924 को कर्नाटक के बेलगांव जिले में स्थित सुलभावी नामक स्थान पर उनका जन्म हुआ था । श्री कुमार गन्धर्व का वास्तविक नाम शिवपुर कोमकली था । परन्तु उनके दिव्य गंधर्व में बचपन से ही अब्दुल करीम खान, ओम कारंथ, वजैबुआ, फेसखान, केशर बाई जैसे वरिष्ठ गायको की रचनाओं को ग्रहण करने की विशेष योग्यता थी इन संगीतकारों की रचनाओ को वे हुबहु प्रस्तुत करने में माहिर थे । उनका इसी गुण के कारण वे प्रो. बी. टी. देवधर से समकालीन संगीत को भी सीरव पाये एवं संगीत की बारिकियो को ग्रहण कर संगीत कला विकसित कर सके ।

कुमार गन्धर्व ने लम्बे समय के कठिन परिश्रम के उपरांत स्वयं की संगीत शैली उत्पन्न की । इस कला के लिए हिम्मत चाहिए थी जो कि उनकी अनोखि संगीत संवेदना के गुण की वजह से उत्पन्न हुई थी । इस गुण की वजह से उन्होंने एक विशिष्ट पारम्परिक संगीत को एक विशिष्ट पहचान दी एवं कुछ नई रागो को रचनाकार अपनी संगीत के प्रति सौन्दर्यता एवं कौशलता का परिचय दिया । यह सत्य रुप में माना जाता है कि सभी भारतीय कलाओ में शास्त्रीय संगीत ने अपनी प्रमाणिक भारतीय चेतना उत्पन्न की जो शास्त्रीय लेखन एवं गायन में अपनी एक अमित छाप छोड़ती है । इस सामाजिक परिपेक्ष में कुमार गन्धर्व ने कुछ पाक संगीत को व्यथित किया जिसे फूल और पत्थर दोनों प्रभावित हुए ।  वास्तव में हमारे भारतीय राग जो लगभग 2000 वर्ष पुरानी परंपरा रखते है, की अनुभूति करने में आतंरिक शक्ति की आवश्यकता होना आवश्यक है । कुमार गन्धर्व संगीत की प्रत्येक विधा में, चाहे वह भजन हो, लोकगीत हो, पारम्परिक राग हो या उनके द्वारा रचित राग हो या कोई विशेष राग हो सभी में ध्यान आकर्षित करते है । कुमार गन्धर्व के गायन में उनकी विशिष्ट आवाज़ संगीत की प्रत्येक विधा को विशेष बना देती है ।

पारम्परिक संगीत ने कुमार गन्धर्व  की रचनात्यक्ता को समृद्ध किया परन्तु कुमार गन्धर्व ने इस संगीत को नये आयाम दिए जो उनके द्वारा बनाई गई बंदिशों एवं नई रागो रागिनियों सहेली तोढ़ी, मालावती, लग्न गन्धर्व बृहद भैरव या संजरी में अनुभव किया जा सकता है।  कुमार गन्धर्व ने विभित संगीत शैलियों को आत्मसार कर उन्हें पुर्नजीवीत किया। यही गुण उनकी शैली का सबसे अकर्षण गुण है ।

कुमार गन्धर्व की शैली में बोल तथा राग प्रस्तुत किये  जाने की विशिष्ट शैली जिसमें वे अचानक ऊँची तान ले लेते थे जिसे कोई नक़ल न कर पाया । कुमार गन्धर्व ने अपनी रचनाशीलता एवं प्रयोग धार्मिता से भारतीय संगीत को नया आयाम दिया है । संगीतकार जो केवल पारम्परिक संगीत को ही अनुसरण करते थे तथा श्रोतागण कुमार गन्धर्व के संगीत से चकित रह गये । संगीत की विधा में पूर्व में प्रचलित कट्टरपन् में विश्वास रखने वाले लोग कुमार गन्धर्व के संगीत के प्रति शंकित रहते थे ।

 

 

Year Award/Honour
2nd Feb. 1966 Honors from Khetia kala Mandal
12th Oct. 1962 Honorary D. Muse award from Akhil Bahrtiya Gandharva Mahavidhalya
11th Feb. 1973 Honorary D. Lit. award from Vikram University, Ujjain.
10th Aug. 1973 State Honor from M.P. State Govt.
6th Dec. 1974 National Honour from Kendriya Music Ntak Academy, New Delhi
1977 PADAM BHUSHAN from Indian Government
1982-83 Shikhar Samman from Madhya Pradesh Govt.
8th Apr. 1984 Honor and an amount of one and half Lac rupees from Gandharva University, Delhi on his Sixtieth Birthday
1985 Kalidas Samman
1989 Fellowship from Sangeet Natak Academy and President Award
1990 PADAM VIBHUSHAN from India Government.